Wednesday, 18 April 2012

ऊपर से पत्थर अन्दर फूल

मत पूछ की हाले-दिल बहुत कमज़ोर हुआ करते हैं,
दीखते हैं ऊपर से पत्थर अन्दर फूल हुआ करते हैं,

जो रास्ता लगता है मुझे बहुत ही अकेला,
हाथ में लिए खंजर लोग इंतजार करते हैं,

दिल के ज़ख्म जब किसी के सामने खुलते है,
तालियाँ बजती हैं लोग वाह वाह करते हैं,
 

तुम ही कहो कैसे मै निभाऊं इस हालत में,
छेद हो जो कपड़ो में तो ये झाँका करते हैं,

इनसे तो भले कब्रिस्तान के मुर्दे हैं शायद,
हम रोते हैं तो वो कहकशे नहीं करते,

हर बात का चाहिए इनको जवाब क्यूँ,
हम तुमसे तो कोई भी वास्ता नहीं करते,

जो हमें लगता की हम लुट जायेंगे यहाँ,
तेरे शहर में हम आसरा नहीं करते,

ना नज़रों की शराफत ना दिल में है खौफ,
होता जो हमें इल्म तो हम यहाँ आया नहीं करते ...

इश्क़

ये मुर्दे से पड़े लोगो कहाँ से आए हैं,
ना आँखों में पानी है और ना जवानी है,
सूखे पत्तों से बिखरे हुए हैं ये,
सीने में ना धड़कन है ना खून में रवानी है,

कुछ सुना किया करते थे हम,
ये लोग हैं वो जो इश्क़ में थे ...

tufan



आँखों में नमी थी, और दिल में तूफान,
रो रहीं थी यादें और गुम थे जस्बात,
फिर भी हमने हालत को समझाया कई बार,
यही है ज़िन्दगी ऐसे ही जीते हैं इसको यार,

कहीं देख रेला चला जा रहा है,
खुशियों की लड़ी है दिल में बहार,
कहीं ग़म की चादर फैलाये है पैर,
टूटे हैं दिल बिखरे हैं ज़ार ज़ार,

 गीत कोई गाऊँ ये सोच के रुक जाऊं,
है अकेला रास्ता कौन सुनेगा,
रूठ भी जाऊं पर क्यूँ मै इतराऊँ,
हँस दो एक बार ये कौन कहेगा,

कितना है ग़म और कितना आराम,
किसको ख़बर कब ढल जाये ये शाम,
ज़ख्म तो जीवन की अनमोल दावा है,
पूछो ये उससे जिसने दर्द पिया है..........(indu)

Wednesday, 21 March 2012

गम बिकते नहीं हमारे

ताल्लुक तो तेरा
होता होगा कितनो से,
हमारा भी जिक्र
छेड़ दिया कीजिये,
गम बिकते नहीं हमारे,
कोई सोदा तो तय करा दीजिये,

कितने बरसों से इन्हें
सहेज कर रक्खा हमने,
अब नहीं चाहिए
बिक जाये तो बिका दीजिये,

वैसे तो मुमकिन नहीं है
गम के बिना जीना
पर संभाल जायेगा दिल
कुछ वक़्त के बाद.................................(इंदु)

Tuesday, 20 March 2012



चार दिन की ज़िन्दगी में रंजो-ग़म कितने,
हैं फासले कितने, मुश्किल है ये बताना............ (indu)

मै पंछी अपनी राह की





मै पंछी अपनी राह की,
मुझको क्या करना इधर उधर,
 
जिस ओर चली मै पंख पसारे,
उस ओर ही मेरी मंजिल है,

कितने चेहरे राहों में,
मुझसे मिलते जुलते थे,

मेरा जैसा ही जीवन था,
मेरी ही एक कहानी थी,

कुछ पल को तो मै सिहर गयी,
कुछ देखा ऐसा बिखर गयी,

कोई संग ना साथी मेरा था,
में तन्हा रस्ता सूना था,

पलकों को मैंने मूँद लिया,
एक डाल पे जा कर मै बैठी,

कुछ सोचा जीवन तो ऐसा है,
हर पल चलते ही रहना है,

जो ठहर गया वो खोता है,
जो चलता है वो पता है,

नव जीवन की इक डोर बंधी,
मै फिर से उड़ने को उतरी,

है हर्ष नया उल्लास नया,
अब लोगों से क्या डरना है,

वो भी मांटी मै भी मांटी,
वो भी इक दिन मिट जाना है,

मै राह चलूँ चलती रहूँ,
अब दिन ना कोई रात लगे

मै पंछी अपनी राह की,
मुझको क्या करना इधर उधर ............ (इंदु)

Monday, 19 March 2012

रहने दे ऐ दिल




रहने दे ऐ दिल कोई बात नहीं, वो पहचानते नहीं तो है अपनी किस्मत,
क्या पता मेरी तरह उसका भी कोई ग़म होगा,
चाह कर भी वो मुझको अपना ना बना पाया.......

फिर किसी मज़िल की तमन्ना ना की तेरे जाने के बाद,
जिंदगी के रास्ते में भिखरे हैं तेरी यादों के फूल,
हर एक राह तो चुभती है, एक तेरी राह में मिलता है सुकून....... (इंदु)